निःशुल्क उपकरण

ग्रहों की स्थिति (निरयण)

किसी भी तिथि, समय और स्थान के लिए नौ ग्रह, लग्न, बाह्य ग्रह और राहु–केतु - राशि, अंश, नक्षत्र, पद और KP उप स्वामी सहित।

22
अक्टूबर 2026
गुरुवार
19:05:02
नई दिल्ली, भारत · Asia/Kolkata
राशि चार्ट…
ग्रहरेखांशनक्षत्र पदनक्षत्र स्वामी / उप स्वामीपूर्ण अंश
लग्न 00° वृषभ 56′ 28″ कृत्तिका 2 Sun, Rahu 30.9411
सूर्य 04° तुला 56′ 05″ चित्रा 4 Mars, Sun 184.9348
चन्द्र 19° कुम्भ 03′ 41″ शतभिषा 4 Rahu, Moon 319.0615
मंगल 19° कर्क 30′ 04″ अश्लेषा 1 Mercury, Venus 109.5012
बुध 26° तुला 33′ 15″ विशाखा 2 Jupiter, Ketu 206.5543
गुरु 28° कर्क 50′ 37″ अश्लेषा 4 Mercury, Saturn 118.8437
शुक्र℞अस्त 07° तुला 28′ 53″ स्वाति 1 Rahu, Rahu 187.4813
शनि℞ 15° मीन 41′ 14″ उत्तरा भाद्रपद 4 Saturn, Jupiter 345.6873
बाह्य ग्रह (केवल जानकारी हेतु)
अरुण℞ 10° वृषभ 45′ 48″ रोहिणी 1 Moon, Moon 40.7632
वरुण℞ 08° मीन 03′ 58″ उत्तरा भाद्रपद 2 Saturn, Ketu 338.0661
यम 08° मकर 50′ 39″ उत्तराषाढ़ा 4 Sun, Venus 278.8443
राहु–केतु (मध्यम एवं स्पष्ट)
राहु℞ 02° कुम्भ 20′ 22″ धनिष्ठा 3 Mars, Ketu 302.3393
केतु℞ 02° सिंह 20′ 22″ मघा 1 Ketu, Venus 122.3393
स्पष्ट राहु℞ 03° कुम्भ 46′ 36″ धनिष्ठा 4 Mars, Venus 303.7767
स्पष्ट केतु℞ 03° सिंह 46′ 36″ मघा 2 Ketu, Moon 123.7767

℞ का अर्थ है वक्री (retrograde)।  ·  अस्त का अर्थ है सूर्य के निकट होने से अस्त (combust)।

सभी अंश निरयण (sidereal) हैं, लाहिड़ी अयनांश 24.2338° घटाकर - गणना हमारे अपने ज्योतिष इंजन से, किसी पंचांग से ली नहीं गई।

राहु–केतु दोनों रूपों में दिए गए हैं: मध्यम (mean) और स्पष्ट (true) नोड। साइट की कुंडलियाँ स्पष्ट नोड का प्रयोग करती हैं, और ऊपर का चार्ट भी वही दिखाता है। परम्परा के अनुसार दोनों सदैव वक्री दर्शाए जाते हैं।

अरुण, वरुण और यम केवल जानकारी के लिए दिए गए हैं - वैदिक फलादेश में इनका प्रयोग नहीं होता। इनकी गणना हमारे MIT इंजन से होती है और यम की स्थिति अन्य पंचांगों से लगभग 25 कलाओं तक भिन्न हो सकती है।

इस पृष्ठ के अंक कहाँ से आते हैं

यहाँ दिया गया प्रत्येक अंक हमारे अपने ज्योतिष इंजन से गणना किया गया है - भूकेन्द्रित (geocentric) दृश्य क्रांतिवृत्त देशांतर, उसमें से लाहिड़ी अयनांश घटाकर। किसी पंचांग से कोई मान उठाया नहीं गया है। यही इंजन आपकी मुफ़्त कुंडली और दैनिक पंचांग भी बनाता है, इसलिए तीनों पृष्ठ कभी आपस में भिन्न नहीं हो सकते।

अपनी कुंडली के अनुसार फल जानें

ग्रहों की स्थिति एक तालिका है; उसका आप पर क्या प्रभाव है, यह आपकी अपनी कुंडली, चल रही दशा और गोचर से तय होता है। आरम्भ अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली से कीजिए, या ज्योतिषी से बात कीजिए।

सामान्य प्रश्न

ये ग्रह स्थितियाँ निरयण हैं या सायन?

निरयण (sidereal)। सायन अंशों में से लाहिड़ी अयनांश घटाकर यह गणना की जाती है - वही पद्धति जो भारतीय पंचांग और वैदिक ज्योतिष में प्रयुक्त होती है।

नक्षत्र उप स्वामी (sub lord) क्या है?

KP पद्धति में प्रत्येक नक्षत्र को विंशोत्तरी दशा के अनुपात में नौ उप-भागों में बाँटा जाता है। जिस उप-भाग में ग्रह है, उसका स्वामी ही उप स्वामी है। KP में फलादेश मुख्यतः इसी पर आधारित होता है।

राहु के दो मान क्यों दिए गए हैं?

चंद्र-पात (node) की गणना दो प्रकार से होती है - मध्यम (एक समान गति) और स्पष्ट (वास्तविक, दोलनशील)। दोनों में सामान्यतः कुछ कलाओं का अंतर रहता है। हमारी कुंडलियाँ स्पष्ट नोड का प्रयोग करती हैं।

"अस्त" का क्या अर्थ है?

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत निकट आ जाता है तो वह अस्त (combust) कहलाता है और उसका बल घट जाता है। प्रत्येक ग्रह के लिए अलग सीमा होती है, और वक्री होने पर बुध व शुक्र की सीमा और कम हो जाती है।