किसी भी तिथि, समय और स्थान के लिए नौ ग्रह, लग्न, बाह्य ग्रह और राहु–केतु — राशि, अंश, नक्षत्र, पद और KP उप स्वामी सहित।
| ग्रह | रेखांश | नक्षत्र | पद | नक्षत्र स्वामी / उप स्वामी | पूर्ण अंश |
|---|---|---|---|---|---|
| लग्न | 28° तुला 19′ 40″ | विशाखा | 3 | Jupiter, Venus | 208.3279 |
| सूर्य | 19° कन्या 40′ 13″ | हस्त | 3 | Moon, Ketu | 169.6702 |
| चन्द्र | 06° सिंह 18′ 48″ | मघा | 2 | Ketu, Rahu | 126.3134 |
| मंगल | 11° कर्क 00′ 23″ | पुष्य | 3 | Saturn, Moon | 101.0063 |
| बुध | 14° तुला 10′ 00″ | स्वाति | 3 | Rahu, Mercury | 194.1668 |
| गुरु | 26° कर्क 25′ 59″ | अश्लेषा | 3 | Mercury, Jupiter | 116.4330 |
| शुक्र℞ | 13° तुला 57′ 38″ | स्वाति | 3 | Rahu, Mercury | 193.9605 |
| शनि℞ | 16° मीन 51′ 30″ | रेवती | 1 | Mercury, Mercury | 346.8583 |
| बाह्य ग्रह (केवल जानकारी हेतु) | |||||
| अरुण℞ | 11° वृषभ 10′ 30″ | रोहिणी | 1 | Moon, Mars | 41.1751 |
| वरुण℞ | 08° मीन 27′ 49″ | उत्तरा भाद्रपद | 2 | Saturn, Venus | 338.4635 |
| यम℞ | 08° मकर 51′ 15″ | उत्तराषाढ़ा | 4 | Sun, Venus | 278.8541 |
| राहु–केतु (मध्यम एवं स्पष्ट) | |||||
| राहु℞ | 03° कुम्भ 09′ 21″ | धनिष्ठा | 3 | Mars, Venus | 303.1557 |
| केतु℞ | 03° सिंह 09′ 21″ | मघा | 1 | Ketu, Sun | 123.1557 |
| स्पष्ट राहु℞ | 04° कुम्भ 50′ 02″ | धनिष्ठा | 4 | Mars, Venus | 304.8340 |
| स्पष्ट केतु℞ | 04° सिंह 50′ 02″ | मघा | 2 | Ketu, Mars | 124.8340 |
℞ का अर्थ है वक्री (retrograde)। · अस्त का अर्थ है सूर्य के निकट होने से अस्त (combust)।
सभी अंश निरयण (sidereal) हैं, लाहिड़ी अयनांश 24.2333° घटाकर — गणना हमारे अपने ज्योतिष इंजन से, किसी पंचांग से ली नहीं गई।
राहु–केतु दोनों रूपों में दिए गए हैं: मध्यम (mean) और स्पष्ट (true) नोड। साइट की कुंडलियाँ स्पष्ट नोड का प्रयोग करती हैं, और ऊपर का चार्ट भी वही दिखाता है। परम्परा के अनुसार दोनों सदैव वक्री दर्शाए जाते हैं।
अरुण, वरुण और यम केवल जानकारी के लिए दिए गए हैं — वैदिक फलादेश में इनका प्रयोग नहीं होता। इनकी गणना हमारे MIT इंजन से होती है और यम की स्थिति अन्य पंचांगों से लगभग 25 कलाओं तक भिन्न हो सकती है।
यहाँ दिया गया प्रत्येक अंक हमारे अपने ज्योतिष इंजन से गणना किया गया है — भूकेन्द्रित (geocentric) दृश्य क्रांतिवृत्त देशांतर, उसमें से लाहिड़ी अयनांश घटाकर। किसी पंचांग से कोई मान उठाया नहीं गया है। यही इंजन आपकी मुफ़्त कुंडली और दैनिक पंचांग भी बनाता है, इसलिए तीनों पृष्ठ कभी आपस में भिन्न नहीं हो सकते।
ग्रहों की स्थिति एक तालिका है; उसका आप पर क्या प्रभाव है, यह आपकी अपनी कुंडली, चल रही दशा और गोचर से तय होता है। आरम्भ अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली से कीजिए, या ज्योतिषी से बात कीजिए।
निरयण (sidereal)। सायन अंशों में से लाहिड़ी अयनांश घटाकर यह गणना की जाती है — वही पद्धति जो भारतीय पंचांग और वैदिक ज्योतिष में प्रयुक्त होती है।
KP पद्धति में प्रत्येक नक्षत्र को विंशोत्तरी दशा के अनुपात में नौ उप-भागों में बाँटा जाता है। जिस उप-भाग में ग्रह है, उसका स्वामी ही उप स्वामी है। KP में फलादेश मुख्यतः इसी पर आधारित होता है।
चंद्र-पात (node) की गणना दो प्रकार से होती है — मध्यम (एक समान गति) और स्पष्ट (वास्तविक, दोलनशील)। दोनों में सामान्यतः कुछ कलाओं का अंतर रहता है। हमारी कुंडलियाँ स्पष्ट नोड का प्रयोग करती हैं।
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत निकट आ जाता है तो वह अस्त (combust) कहलाता है और उसका बल घट जाता है। प्रत्येक ग्रह के लिए अलग सीमा होती है, और वक्री होने पर बुध व शुक्र की सीमा और कम हो जाती है।