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गुरु पुष्य योग 18 जून 2026: शुभ मुहूर्त, महत्व और क्या करें

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Astro Logics Admin
16 जून 2026 · 3 मिनट पढ़ें
गुरु पुष्य योग 18 जून 2026: शुभ मुहूर्त, महत्व और क्या करें

गुरुवार, 18 जून 2026 को वैदिक पंचांग का एक अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है - गुरु पुष्य योग। जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार (बृहस्पति का दिन) के साथ मिलता है, तब यह दुर्लभ योग बनता है। इस बार इसके साथ अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जिससे इस दिन की शुभता और बढ़ जाती है।

शुभ मुहूर्त (समय)

  • पुष्य नक्षत्र: 17 जून दोपहर से 18 जून दोपहर ~1:02 बजे तक
  • गुरु पुष्य का शुभ काल: गुरुवार सूर्योदय (~5:23) से लगभग दोपहर 1:02 बजे तक
  • नोट: नक्षत्र समाप्ति का समय पूरे भारत में (IST में) लगभग समान रहता है; केवल सूर्योदय का समय शहर के अनुसार थोड़ा बदलता है। अपने शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त किसी ज्योतिषी से पुष्टि कर लें।

गुरु पुष्य योग मुहूर्त (नई दिल्ली)

  • मुख्य शुभ अवधि: 18 जून 2026 को सुबह 05:23 से दोपहर 01:02 बजे तक।
  • पुष्य नक्षत्र 17 जून दोपहर को शुरू होता है और 18 जून को 01:02 बजे तक जारी रहता है, जिससे गुरुवार (गुरुवार) के साथ मिलकर गुरु पुष्य योग का निर्माण होता है।

गुरु पुष्य योग विशेष क्यों है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार:

  • पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ नक्षत्रों में से एक माना जाता है।
  • गुरुवार बृहस्पति (गुरु) के शासन में है।
  • जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार को पड़ता है, तो गुरु पुष्य योग बनता है, जो परंपरागत रूप से वृद्धि, समृद्धि, बुद्धिमत्ता, शिक्षा, संपत्ति और नई शुरुआत से जुड़ा होता है।

गुरु पुष्य योग में क्या शुभ माना जाता है?

परंपरागत रूप से, लोग इस दिन को निम्नलिखित कार्यों के लिए चुनते हैं:

  • सोना, चांदी, आभूषण खरीदना
  • वाहन क्रय करना
  • नया व्यापार शुरू करना
  • दुकान या कार्यालय खोलना
  • दीर्घकालीन निवेश करना
  • शिक्षा या कौशल सीखना शुरू करना
  • महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करना
  • लक्ष्मी और बृहस्पति की पूजा करना
  • नए घर में प्रवेश करना (कई परंपराओं में इसे अनुकूल माना जाता है)

महत्वपूर्ण नोट

कई ज्योतिषी गुरु पुष्य योग को एक ऐसे दिन के रूप में बताते हैं जो सार्थक कार्य के लिए उपयोग किए जाने पर एक मोड़ बन सकता है। हालांकि, कोई प्रामाणिक ज्योतिषीय नियम नहीं है जो कहता है कि इस दिन सभी के जीवन में "सबसे बड़ा परिवर्तन" होगा। अधिक सटीक कथन यह है:

"गुरु पुष्य योग को साल के सबसे अच्छे मुहूर्तों में से एक माना जाता है, विशेषकर संपत्ति, व्यापार, शिक्षा और समृद्धि से संबंधित कार्यों को शुरू करने के लिए।"

पुष्य नक्षत्र का महत्व

पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवाँ नक्षत्र है और कर्क राशि में स्थित है। इसका दूसरा नाम तिष्य है, जिसका अर्थ है "पोषण करने वाला।" इसके देवता बृहस्पति (देवगुरु) और स्वामी ग्रह शनि हैं; इसका प्रतीक गाय का थन, कमल और बाण माना जाता है। शास्त्रों में पुष्य को स्थायी और शुभ फल देने वाला सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र कहा गया है।

गुरु पुष्य योग में क्या करें

मान्यता के अनुसार यह मुहूर्त इन कार्यों के लिए शुभ माना जाता है:

  • सोना-चांदी, आभूषण, वाहन, संपत्ति और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी
  • नया निवेश और दीर्घकालिक वित्तीय निर्णय
  • नया व्यापार, दुकान या कार्यालय आरंभ करना, समझौते/हस्ताक्षर
  • विद्या-आरंभ, पढ़ाई व कौशल सीखना शुरू करना, मंत्र दीक्षा, पुस्तकें खरीदना
  • लक्ष्मी-बृहस्पति पूजन और दान-पुण्य, गृह-प्रवेश (कई परंपराओं में शुभ)

एक महत्वपूर्ण अपवाद - विवाह

शास्त्रीय परंपरा में कहा गया है कि पुष्य नक्षत्र हर शुभ कार्य के लिए उत्तम है, परंतु विवाह इसका अपवाद है। इसलिए विवाह के मुहूर्त के लिए पुष्य नक्षत्र को टाला जाता है।

क्या इस दिन जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु पुष्य योग अवसरों के द्वार खोलने वाला शुभ समय माना जाता है। यदि इस दिन सकारात्मक और महत्वपूर्ण शुरुआत की जाए तो भविष्य में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि सफलता व्यक्ति के कर्म, प्रयास और परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।

विशेष उपाय

  • पीले वस्त्र धारण करें।
  • केले के वृक्ष या भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का 108 बार जप करें।
  • जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करें।

निष्कर्ष

18 जून 2026 का गुरु पुष्य योग नई शुरुआत, निवेश, व्यवसाय और समृद्धि से जुड़े कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। यदि आप कोई महत्वपूर्ण निर्णय, खरीदारी या नया प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो यह दिन आपके लिए विशेष महत्व रख सकता है। ध्यान रहे - ज्योतिष मार्गदर्शन है, निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं; अपने व्यक्तिगत मुहूर्त के लिए कुंडली के अनुसार सलाह लें।

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(अस्वीकरण / Disclaimer: यह लेख पारंपरिक वैदिक ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है। पंचांग समय स्थान अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं। This article is based on traditional Vedic astrology beliefs; panchang timings may vary slightly by location and source.)

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