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श्राद्ध तिथियाँ 2026: पितृ पक्ष तिथि कैलेंडर, कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त सहित

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Astro Logics Admin
24 सितंबर 2026 · 6 मिनट पढ़ें
श्राद्ध तिथियाँ 2026: पितृ पक्ष तिथि कैलेंडर, कुतुप, रौहिण और अपराह्न मुहूर्त सहित

पितृ पक्ष 2026 पंद्रह दिनों का है — शनिवार, 26 सितम्बर को पूर्णिमा श्राद्ध से शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या तक। नीचे की तालिका में हर दिन का श्राद्ध और वे तीन काल दिए गए हैं जिनमें परम्परा से श्राद्ध-कर्म किया जाता है — कुतुप, रौहिण और अपराह्न। सभी समय दिल्ली के लिए गणना किए गए हैं।

  • आरम्भ: पूर्णिमा श्राद्ध, शनिवार, 26 सितम्बर 2026
  • समापन: सर्व पितृ अमावस्या, शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
  • नक्षत्र-आधारित विशेष दिन: महा भरणी मंगलवार, 29 सितम्बर को · मघा बुधवार, 7 अक्टूबर को
  • एक दिन में दो श्राद्ध: चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध दोनों बुधवार, 30 सितम्बर को
  • समय: दिल्ली के; अन्य शहरों में कुछ मिनट का अंतर

2026 का सम्पूर्ण श्राद्ध कैलेंडर

तिथि (2026)श्राद्धकुतुपरौहिणअपराह्न
शनिवार, 26 सितम्बरपूर्णिमा11:47–12:3612:36–13:2413:24–15:48
रविवार, 27 सितम्बरप्रतिपदा11:48–12:3612:36–13:2413:24–15:48
सोमवार, 28 सितम्बरद्वितीया11:47–12:3512:35–13:2313:23–15:47
मंगलवार, 29 सितम्बरतृतीया · महा भरणी11:47–12:3512:35–13:2313:23–15:46
बुधवार, 30 सितम्बरचतुर्थी · पंचमी11:47–12:3412:34–13:2213:22–15:45
गुरुवार, 1 अक्टूबरषष्ठी11:46–12:3412:34–13:2113:21–15:44
शुक्रवार, 2 अक्टूबरसप्तमी11:46–12:3412:34–13:2113:21–15:43
शनिवार, 3 अक्टूबरअष्टमी11:46–12:3312:33–13:2113:21–15:43
रविवार, 4 अक्टूबरनवमी · मातृ नवमी11:46–12:3312:33–13:2013:20–15:42
सोमवार, 5 अक्टूबरदशमी11:45–12:3312:33–13:2013:20–15:41
मंगलवार, 6 अक्टूबरएकादशी11:46–12:3312:33–13:2013:20–15:41
बुधवार, 7 अक्टूबरद्वादशी · मघा11:45–12:3112:31–13:1813:18–15:39
गुरुवार, 8 अक्टूबरत्रयोदशी11:45–12:3112:31–13:1813:18–15:38
शुक्रवार, 9 अक्टूबरचतुर्दशी (घात)11:44–12:3112:31–13:1813:18–15:38
शनिवार, 10 अक्टूबरसर्व पितृ अमावस्या11:44–12:3112:31–13:1713:17–15:37

जिस तिथि को आपके पूर्वज का देहांत हुआ, वही तिथि देखिए — चाहे वह शुक्ल पक्ष की हो या कृष्ण पक्ष की; शुक्ल या कृष्ण किसी भी नवमी को हुए देहांत का श्राद्ध एक ही नवमी श्राद्ध पर होता है — और ऊपर की मिलती-जुलती तारीख पर श्राद्ध कीजिए। तर्पण और पिंडदान की पूरी विधि के लिए पितृ पक्ष 2026 मार्गदर्शिका देखें।

श्राद्ध की तिथि अपराह्न से क्यों तय होती है

अधिकतर पर्व उस तिथि से तय होते हैं जो सूर्योदय के समय चल रही हो। श्राद्ध के साथ ऐसा नहीं है। शास्त्रीय नियम यह है कि श्राद्ध उस तिथि का होता है जो अपराह्न में व्याप्त हो — दिन के पाँच बराबर भागों में से चौथा भाग, मोटे तौर पर दोपहर बाद का समय। शास्त्र यही भाग पितरों को सौंपते हैं।

इसीलिए सूर्योदय की तिथि पर चलने वाले कुछ कैलेंडर इस कैलेंडर से मेल नहीं खाते। उदाहरण के लिए गुरुवार, 1 अक्टूबर को सूर्योदय पर पंचमी है, पर वह दोपहर 12:36 पर समाप्त हो जाती है और पूरे अपराह्न में षष्ठी रहती है — इसलिए गुरुवार षष्ठी श्राद्ध का दिन है। यही खिसकाव 2 और 3 अक्टूबर को भी होता है।

पंद्रह दिन, सोलह श्राद्ध

इस पक्ष में सोलह तिथि-श्राद्ध होते हैं — पूर्णिमा, प्रतिपदा से चतुर्दशी तक की चौदह तिथियाँ, और अमावस्या — पर दिन केवल पंद्रह हैं। 2026 में यह संकुचन पंचमी पर पड़ता है। पंचमी बुधवार, 30 सितम्बर को दोपहर 2:56 पर आरम्भ होती है, इसलिए उस दिन के अपराह्न का केवल अंतिम भाग उसे मिलता है, और वह गुरुवार को दोपहर 12:36 पर, उस दिन का अपराह्न शुरू होने से पहले ही समाप्त हो जाती है। अतः पंचमी को अपना कोई पूरा अपराह्न नहीं मिलता, और उसका श्राद्ध बुधवार को चतुर्थी के साथ किया जाता है।

कुछ स्थानीय पंचांग पंचमी श्राद्ध गुरुवार को रखते हैं, क्योंकि उस दिन सूर्योदय पर पंचमी है। यदि आपका परिवार सदा से ऐसे पंचांग का पालन करता आया है, तो उसी का पालन करें; ऊपर का तर्क बस यह बताता है कि अधिकांश प्रकाशित सूचियाँ, और हमारी सूची, बुधवार क्यों कहती हैं। पंचमी श्राद्ध पृष्ठ बताता है कि उस दिन किनका श्राद्ध होता है।

कुतुप, रौहिण और अपराह्न — कौन-सा समय लें

दिन के प्रकाश को पंद्रह मुहूर्तों में भी बाँटा जाता है। आठवाँ मुहूर्त कुतुप और नौवाँ रौहिण कहलाता है, और ये मध्याह्न के आसपास पड़ते हैं। परम्परागत मार्गदर्शन यह है कि श्राद्ध कुतुप में आरम्भ करें, रौहिण तक ले जाएँ, और अपराह्न के भीतर तर्पण के साथ पूर्ण करें। इस वर्ष दिल्ली में पूरे पक्ष में कुतुप प्रतिदिन सुबह 11:44 से 11:48 के बीच आरम्भ होता है, और अपराह्न दोपहर 3:37 से 3:48 के बीच समाप्त होता है।

स्नान और तैयारी पहले हो सकती है, पर पितरों को भोजन, पिंड और ब्राह्मण, गाय, कुत्ते तथा कौवे को भोजन इन्हीं घड़ियों में दिया जाता है।

नक्षत्र से तय होने वाले दो दिन: भरणी और मघा

पक्ष के दो श्राद्ध तिथि से नहीं, चंद्रमा के नक्षत्र से तय होते हैं। महा भरणी मंगलवार, 29 सितम्बर को है, जब पूरे अपराह्न में चंद्रमा यम के नक्षत्र भरणी में है — महा भरणी श्राद्ध के बारे में पढ़ेंमघा, जिसके अधिदेवता स्वयं पितर हैं, बुधवार, 7 अक्टूबर के अपराह्न में है, जो द्वादशी भी है — द्वादशी और मघा श्राद्ध

विशेष पूर्वजों के लिए निर्धारित दिन

  • पंचमी (बुधवार, 30 सितम्बर) — जिनका देहांत अविवाहित अवस्था में हुआ
  • मातृ नवमी (रविवार, 4 अक्टूबर) — माताएँ और परिवार की वे स्त्रियाँ जिनका देहांत सौभाग्यवती अवस्था में हुआ
  • द्वादशी (बुधवार, 7 अक्टूबर) — जिन्होंने संन्यास लिया था
  • त्रयोदशी (गुरुवार, 8 अक्टूबर) — दिवंगत बच्चे
  • चतुर्दशी (शुक्रवार, 9 अक्टूबर) — केवल अकाल या हिंसक मृत्यु वाले
  • सर्व पितृ अमावस्या (शनिवार, 10 अक्टूबर) — सभी पूर्वज, और वे भी जिनकी तिथि ज्ञात नहीं

मंगलवार, 6 अक्टूबर को एकादशी श्राद्ध इंदिरा एकादशी के दिन ही है — पितृ पक्ष की वह एकादशी जिसकी कथा एक पूर्वज की मुक्ति की है।

यदि तिथि ज्ञात न हो

जब देहांत की तिथि ज्ञात न हो, या तिथि-श्राद्ध छूट गया हो, तो परम्परा श्राद्ध को शनिवार, 10 अक्टूबर की सर्व पितृ अमावस्या पर करने को कहती है। यही दिन उन पूर्वजों का भी है जिनका स्वाभाविक देहांत चतुर्दशी को हुआ, क्योंकि चतुर्दशी स्वयं अकाल मृत्यु के लिए आरक्षित है। किसी पुरानी तारीख की तिथि जानने के लिए हमारा पंचांग खोलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ पक्ष 2026 कब से कब तक है?
यह शनिवार, 26 सितम्बर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध से आरम्भ होकर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को सर्व पितृ अमावस्या पर समाप्त होता है। प्रतिपदा श्राद्ध, जिसे बहुत से लोग पहला दिन मानते हैं, रविवार, 27 सितम्बर को है।

अलग-अलग कैलेंडरों में श्राद्ध की तारीखें अलग क्यों दिखती हैं?
मुख्यतः इसलिए कि कुछ कैलेंडर सूर्योदय की तिथि देते हैं, जबकि श्राद्ध अपराह्न की तिथि से चलता है। गणना के शहर से भी थोड़ा अंतर आता है। यहाँ की तारीखें दिल्ली के लिए अपराह्न नियम से हैं।

श्राद्ध करने का सबसे उपयुक्त समय कौन-सा है?
मध्याह्न के आसपास कुतुप मुहूर्त में आरम्भ करें, रौहिण तक चलें, और अपराह्न के भीतर कर्म पूर्ण करें। हर दिन के सटीक समय ऊपर की तालिका में हैं।

2026 में चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध एक ही दिन क्यों है?
पंचमी बुधवार, 30 सितम्बर को दोपहर 2:56 पर आरम्भ होकर गुरुवार को दोपहर 12:36 पर समाप्त हो जाती है, इसलिए उसे अपना कोई पूरा अपराह्न नहीं मिलता। अतः उसका श्राद्ध बुधवार को चतुर्थी के साथ किया जाता है।

यदि पूर्वज का तिथि-श्राद्ध छूट जाए तो क्या करें?
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 की सर्व पितृ अमावस्या पर करें — परम्परा यह दिन सभी पूर्वजों के लिए और हर उस श्राद्ध के लिए रखती है जो अपनी तिथि पर न हो सका।

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