Pooja Vidhi

हरियाली तीज 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, कथा और महत्व

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Astro Logics Admin
10 अगस्त 2026 · 2 मिनट पढ़ें
हरियाली तीज 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, कथा और महत्व

हरियाली तीज एक आनंदमय मानसून त्योहार है जो देवी पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है और उनके दिव्य मिलन का जश्न मनाता है। श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, इसे व्रत, हरी पोशाक, मेहँदी, झूले और लोक गीतों के साथ मनाया जाता है, विशेष रूप से महिलाओं द्वारा। यहाँ हरियाली तीज 2026 के लिए आपका गाइड है।

हरियाली तीज 2026: तारीख और तिथि

हरियाली तीजशनिवार, 15 अगस्त 2026
तृतीया तिथि शुरू होती हैशुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को 06:47 PM
तृतीया तिथि समाप्त होती हैशनिवार, 15 अगस्त 2026 को 05:28 PM

चूँकि तृतीया तिथि पूरे दिन के अधिकांश भाग में प्रभावी रहती है, पूजा और उत्सव आराम से 15 अगस्त के माध्यम से किए जा सकते हैं। शुभ रवि योग और सिद्ध योग प्रचलित हैं, जो शिव-पार्वती पूजन के लिए आदर्श है।

महत्व

कहा जाता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव के साथ मिलन के लिए कई जन्मों में कठोर तपस्या की, और इसी दिन शिव ने अंततः उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और कल्याण के लिए तीज का व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियाँ एक प्रेमपूर्ण जीवन साथी के लिए प्रार्थना करती हैं।

हरियाली तीज व्रत विधि

  • सुबह जल्दी उठें, नहाएँ, और हरी पोशाक, चूड़ियाँ और मेहँदी सजाएँ।
  • शिव और पार्वती की मूर्तियाँ स्थापित करें और फूल, चंदन, फल और मिठाइयों से उनकी पूजा करें।
  • पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखें।
  • हरियाली तीज की कथा पढ़ें या सुनें, लोक गीत गाएँ और झूले का आनंद लें।
  • शाम की पूजा और चाँद दर्शन के बाद, पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत तोड़ें।

शिव-पार्वती मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

ॐ गौरी शंकराय नमः॥

FAQ

हरियाली तीज 2026 कब है?
शनिवार, 15 अगस्त 2026 (श्रावण शुक्ल तृतीया)।

तीज व्रत कौन रखता है?
विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र के लिए, और अविवाहित लड़कियाँ एक अच्छे जीवन साथी के लिए।

इस तीज पर देवी पार्वती आपके घर को प्रेम और सामंजस्य से आशीर्वादित करें। अपनी जन्म कुंडली के आधार पर व्यक्तिगत शुभ मुहूर्त, उपाय या रीडिंग के लिए, Astro Logics पर एक ज्योतिषी से बात करें, हमारे आध्यात्मिक पुस्तकालय में आरती, चालीसा और मंत्रों का अन्वेषण करें, या दिव्य स्टोर में पूजा की आवश्यक वस्तुएँ खोजें।

नोट: यह लेख वैदिक पंचांग, परंपरागत विश्वासों और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। तारीखें और मुहूर्त समय उत्तर भारत के मानक पंचांग का पालन करते हैं और शहर तथा पंचांग परंपरा (पूर्णिमांत / अमांत) के अनुसार भिन्न हो सकते हैं — व्रत का पालन करने से पहले कृपया अपने स्थानीय पंचांग या किसी विद्वान पंडित से पुष्टि करें।

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