अष्ट लक्ष्मी माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं, और हर स्वरूप एक अलग प्रकार का धन है: केवल पैसा नहीं, बल्कि अन्न, संतान, साहस, सफलता, ज्ञान और मन की शांति भी। आठों की एक साथ पूजा जीवन के हर क्षेत्र में पूर्णता की प्रार्थना है, इसीलिए बहुत से परिवार दीपावली की रात, रविवार, 8 नवम्बर 2026 को, और वर्ष भर शुक्रवार को अष्ट लक्ष्मी पूजा करते हैं।
नीचे स्वरूप उसी क्रम में दिए गए हैं जो सबसे अधिक प्रचलित है। श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र इन्हीं आठों की स्तुति अपने क्रम में करता है, आदि लक्ष्मी से आरम्भ करके धन लक्ष्मी पर समाप्त, और वीर लक्ष्मी को उनके दूसरे नाम धैर्य लक्ष्मी से पुकारता है।
मंत्र: ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः
प्रथम और आदि स्वरूप, जिन्हें महालक्ष्मी भी कहते हैं, जो नारायण के साथ रहती हैं। मन की शांति, आध्यात्मिक कल्याण और मोक्ष के लिए, उस धन के लिए जो कभी समाप्त नहीं होता, इनकी उपासना होती है।
मंत्र: ॐ धनलक्ष्म्यै नमः
धन और स्वर्ण की लक्ष्मी, जो धन से भरा कलश लिए दिखाई जाती हैं। स्थिर आय और ऋण से मुक्ति के लिए इनकी उपासना होती है।
मंत्र: ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः
अन्न और धान्य की लक्ष्मी, जो धान की बालियों के साथ दिखाई जाती हैं। अन्न का अपव्यय न करना और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना ही इनका सम्मान है।
मंत्र: ॐ गजलक्ष्म्यै नमः
कमल पर विराजमान लक्ष्मी, जिन पर दो हाथी जल डालते हैं। ये पद, सम्मान, पशुधन और भूमि की समृद्धि का प्रतीक हैं।
मंत्र: ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः
गोद में शिशु लिए लक्ष्मी। संतान, और उनके स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए इनकी उपासना होती है।
मंत्र: ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः
साहस और धैर्य की लक्ष्मी। कठिन समय में अडिग रहने की शक्ति के लिए इनकी उपासना होती है।
मंत्र: ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः
विजय की लक्ष्मी, कमल पर विराजमान। किसी कार्य में सफलता और भय से मुक्ति के लिए इनकी उपासना होती है।
मंत्र: ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः
ज्ञान और कलाओं की लक्ष्मी, श्वेत वस्त्रों में। विद्यार्थी, शिक्षक और कलाकार इनकी उपासना करते हैं।
पूजा में हर मंत्र एक बार, एक फूल या थोड़े अक्षत के साथ बोला जाता है, या जिस स्वरूप की सबसे अधिक आवश्यकता हो उसका मंत्र माला पर 11 या 108 बार जपा जाता है। इनके साथ आठों के लिए एक साथ महालक्ष्मी मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः जपा जाता है; इसका अर्थ हमारे महालक्ष्मी मंत्र पृष्ठ पर है।
| स्वरूप | मंत्र |
|---|---|
| आदि लक्ष्मी | ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः |
| धन लक्ष्मी | ॐ धनलक्ष्म्यै नमः |
| धान्य लक्ष्मी | ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः |
| गज लक्ष्मी | ॐ गजलक्ष्म्यै नमः |
| संतान लक्ष्मी | ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः |
| वीर (धैर्य) लक्ष्मी | ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः |
| विजय लक्ष्मी | ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः |
| विद्या लक्ष्मी | ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः |
लक्ष्मी पूजा के सामान्य क्रम के लिए हमारी लक्ष्मी पूजा विधि देखें; लंबी अर्चना के लिए लक्ष्मी जी के 108 नाम।
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माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप कौन-से हैं?
आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर (धैर्य) लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी।
हर अष्ट लक्ष्मी का मंत्र क्या है?
हर स्वरूप का छोटा नाम-मंत्र है: ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः, ॐ धनलक्ष्म्यै नमः, ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः, ॐ गजलक्ष्म्यै नमः, ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः, ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः, ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः और ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः।
क्या अष्ट लक्ष्मी पूजा दीपावली पर की जा सकती है?
हाँ। बहुत से परिवार यह पूजा दीपावली की रात, रविवार, 8 नवम्बर 2026 को प्रदोष काल में करते हैं, आठों स्वरूपों के लिए एक-एक दीपक जलाकर।
विद्यार्थियों को किस लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए?
विद्या लक्ष्मी की, जो ज्ञान और कलाओं का स्वरूप हैं। उनका मंत्र है ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः।
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