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अष्ट लक्ष्मी पूजा विधि और मंत्र: माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप और उनकी पूजा कैसे करें

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AstroLogics
7 नवंबर 2026 · 5 मिनट पढ़ें
अष्ट लक्ष्मी पूजा विधि और मंत्र: माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप और उनकी पूजा कैसे करें

अष्ट लक्ष्मी माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं, और हर स्वरूप एक अलग प्रकार का धन है: केवल पैसा नहीं, बल्कि अन्न, संतान, साहस, सफलता, ज्ञान और मन की शांति भी। आठों की एक साथ पूजा जीवन के हर क्षेत्र में पूर्णता की प्रार्थना है, इसीलिए बहुत से परिवार दीपावली की रात, रविवार, 8 नवम्बर 2026 को, और वर्ष भर शुक्रवार को अष्ट लक्ष्मी पूजा करते हैं।

माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप और उनके मंत्र

नीचे स्वरूप उसी क्रम में दिए गए हैं जो सबसे अधिक प्रचलित है। श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र इन्हीं आठों की स्तुति अपने क्रम में करता है, आदि लक्ष्मी से आरम्भ करके धन लक्ष्मी पर समाप्त, और वीर लक्ष्मी को उनके दूसरे नाम धैर्य लक्ष्मी से पुकारता है।

1. आदि लक्ष्मी

मंत्र: ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः

प्रथम और आदि स्वरूप, जिन्हें महालक्ष्मी भी कहते हैं, जो नारायण के साथ रहती हैं। मन की शांति, आध्यात्मिक कल्याण और मोक्ष के लिए, उस धन के लिए जो कभी समाप्त नहीं होता, इनकी उपासना होती है।

2. धन लक्ष्मी

मंत्र: ॐ धनलक्ष्म्यै नमः

धन और स्वर्ण की लक्ष्मी, जो धन से भरा कलश लिए दिखाई जाती हैं। स्थिर आय और ऋण से मुक्ति के लिए इनकी उपासना होती है।

3. धान्य लक्ष्मी

मंत्र: ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः

अन्न और धान्य की लक्ष्मी, जो धान की बालियों के साथ दिखाई जाती हैं। अन्न का अपव्यय न करना और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना ही इनका सम्मान है।

4. गज लक्ष्मी

मंत्र: ॐ गजलक्ष्म्यै नमः

कमल पर विराजमान लक्ष्मी, जिन पर दो हाथी जल डालते हैं। ये पद, सम्मान, पशुधन और भूमि की समृद्धि का प्रतीक हैं।

5. संतान लक्ष्मी

मंत्र: ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः

गोद में शिशु लिए लक्ष्मी। संतान, और उनके स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए इनकी उपासना होती है।

6. वीर (धैर्य) लक्ष्मी

मंत्र: ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः

साहस और धैर्य की लक्ष्मी। कठिन समय में अडिग रहने की शक्ति के लिए इनकी उपासना होती है।

7. विजय लक्ष्मी

मंत्र: ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः

विजय की लक्ष्मी, कमल पर विराजमान। किसी कार्य में सफलता और भय से मुक्ति के लिए इनकी उपासना होती है।

8. विद्या लक्ष्मी

मंत्र: ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः

ज्ञान और कलाओं की लक्ष्मी, श्वेत वस्त्रों में। विद्यार्थी, शिक्षक और कलाकार इनकी उपासना करते हैं।

अष्ट लक्ष्मी मंत्र एक नज़र में

पूजा में हर मंत्र एक बार, एक फूल या थोड़े अक्षत के साथ बोला जाता है, या जिस स्वरूप की सबसे अधिक आवश्यकता हो उसका मंत्र माला पर 11 या 108 बार जपा जाता है। इनके साथ आठों के लिए एक साथ महालक्ष्मी मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः जपा जाता है; इसका अर्थ हमारे महालक्ष्मी मंत्र पृष्ठ पर है।

स्वरूपमंत्र
आदि लक्ष्मीॐ आदिलक्ष्म्यै नमः
धन लक्ष्मीॐ धनलक्ष्म्यै नमः
धान्य लक्ष्मीॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः
गज लक्ष्मीॐ गजलक्ष्म्यै नमः
संतान लक्ष्मीॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः
वीर (धैर्य) लक्ष्मीॐ वीरलक्ष्म्यै नमः
विजय लक्ष्मीॐ विजयलक्ष्म्यै नमः
विद्या लक्ष्मीॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः

पूजा सामग्री

  • लाल या पीले वस्त्र से ढकी चौकी, और अष्ट लक्ष्मी या लक्ष्मी जी का चित्र
  • आम के पत्तों और नारियल के साथ जल से भरा कलश
  • आठ घी के दीपक, हर स्वरूप के लिए एक, और धूप
  • कमल या लाल फूल, कुमकुम, हल्दी, अक्षत और माला
  • खीर या कोई सफ़ेद मिठाई, फल, और कुछ सिक्के या सोने-चाँदी की कोई वस्तु

अष्ट लक्ष्मी पूजा विधि, चरण दर चरण

  1. तैयारी: घर और पूजा-स्थान की सफ़ाई करें, स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। चित्र को चौकी पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके रखें।
  2. पहले गणेश: दूर्वा और मिठाई से गणेश जी की पूजा करें, ताकि पूजा निर्विघ्न हो।
  3. कलश और संकल्प: कलश स्थापित करें, फिर दाहिनी हथेली में जल लेकर अपना नाम, दिन और पूजा का उद्देश्य बोलें।
  4. देवी का आवाहन: लक्ष्मी जी को कुमकुम, हल्दी, अक्षत और फूल अर्पित करें, और उनके सामने आठ दीपक पंक्ति या गोले में जलाएँ।
  5. अष्ट नाम अर्चना: ऊपर के आठों मंत्र क्रम से बोलें, हर मंत्र के साथ एक फूल या अक्षत अर्पित करें।
  6. स्तोत्र: अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। साथ में कनकधारा स्तोत्र या श्री सूक्त भी पढ़ सकते हैं।
  7. नैवेद्य और आरती: खीर और फल का भोग लगाएँ, ॐ जय लक्ष्मी माता आरती करें, और परिवार में प्रसाद बाँटें।

लक्ष्मी पूजा के सामान्य क्रम के लिए हमारी लक्ष्मी पूजा विधि देखें; लंबी अर्चना के लिए लक्ष्मी जी के 108 नाम।

अष्ट लक्ष्मी पूजा कब करें

  • दीपावली की रात: रविवार, 8 नवम्बर 2026, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में। मुहूर्त हमारी दीपावली 2026 मार्गदर्शिका में है।
  • शुक्रवार: शुक्रवार लक्ष्मी जी का दिन है; पूजा संध्या को, सूर्यास्त के बाद की जाती है।
  • शरद पूर्णिमा और मार्गशीर्ष के गुरुवार, जिन्हें बहुत से परिवार महालक्ष्मी के लिए रखते हैं।

अपने शहर में किसी भी दिन के शुभ समय के लिए दैनिक पंचांग देखें।

अष्ट लक्ष्मी पूजा: सामान्य प्रश्न

माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूप कौन-से हैं?
आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर (धैर्य) लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी।

हर अष्ट लक्ष्मी का मंत्र क्या है?
हर स्वरूप का छोटा नाम-मंत्र है: ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः, ॐ धनलक्ष्म्यै नमः, ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः, ॐ गजलक्ष्म्यै नमः, ॐ सन्तानलक्ष्म्यै नमः, ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः, ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः और ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः।

क्या अष्ट लक्ष्मी पूजा दीपावली पर की जा सकती है?
हाँ। बहुत से परिवार यह पूजा दीपावली की रात, रविवार, 8 नवम्बर 2026 को प्रदोष काल में करते हैं, आठों स्वरूपों के लिए एक-एक दीपक जलाकर।

विद्यार्थियों को किस लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए?
विद्या लक्ष्मी की, जो ज्ञान और कलाओं का स्वरूप हैं। उनका मंत्र है ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः।

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