यह कार्तिक माहात्म्य का पाँचवाँ अध्याय है। राजा पृथु पूछते हैं कि कार्तिक का व्रत किस विधि से किया जाए, और देवर्षि नारद व्रती का पूरा दिन बताते हैं। इसी बीच वे यह भी सुनाते हैं कि भगवान विष्णु ने उनसे अपने निवास के बारे में क्या कहा था।
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राजा पृथु ने देवर्षि नारद से एक और प्रश्न पूछा। हे देवर्षि, कार्तिक का व्रत किस विधि से करें? व्रती का दिन कैसे शुरू हो और कैसे पूरा हो? कृपा करके सब विस्तार से बताइए।
नारद जी ने कहा कि राजन, कार्तिक का व्रत आश्विन शुक्ल एकादशी से आरंभ होता है। व्रती रोज़ ब्रह्म मुहूर्त में उठे, यानी सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले। फिर जल का पात्र लेकर गाँव से बाहर पूर्व या उत्तर दिशा में जाए और शरीर की शुद्धि करे। नारद जी कहते हैं कि जब तक शरीर और मुख शुद्ध न हो, तब तक कोई मंत्र फल नहीं देता।
इसके बाद दातुन की बारी आती है। लगभग बारह अंगुल लंबी, सुगंधित और कोमल टहनी लेकर प्रार्थना करें कि मुझे आयु, यश, बुद्धि और ज्ञान मिले। फिर पवित्र जल में स्नान करें। स्नान के बाद फूल, चंदन और पान लेकर प्रसन्न मन से मंदिर जाएँ और हर देवता को अलग-अलग अर्घ्य और आचमन देकर प्रणाम करें।
फिर भगवान श्री हरि के कीर्तन में शामिल हों। जो भक्त कीर्तन गाते हैं, उन्हें माला, चंदन और पान देकर सम्मान दें। नारद जी इसका कारण बताते हैं कि कलियुग में भगवान को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा साधन उनका नाम-कीर्तन ही है।
यहीं नारद जी ने राजा को अपना एक अनुभव सुनाया। एक बार उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु से पूछा था कि प्रभु, आप सबसे अधिक कहाँ निवास करते हैं? भगवान बोले कि नारद, मैं न केवल वैकुंठ में रहता हूँ, न केवल योगियों के हृदय में। जहाँ मेरे भक्त प्रेम से मेरा नाम गाते हैं, मैं वहीं रहता हूँ। भगवान ने यह भी कहा कि जो मेरे भक्तों का सम्मान करता है, उससे मैं अपनी पूजा से भी अधिक प्रसन्न होता हूँ।
नारद जी ने फूलों के नियम भी बताए कि हर देवता को उनके प्रिय फूल ही चढ़ाएँ। पूजा के अंत में भगवान से क्षमा माँगें कि प्रभु, मंत्र में, विधि में या भक्ति में जो कमी रह गई हो, उसे आप ही पूरा कर दीजिए। फिर साष्टांग प्रणाम करें, कीर्तन करें, श्री हरि की कथा सुनें और प्रसाद ग्रहण करें। नारद जी कहते हैं कि जो इस विधि से कार्तिक का व्रत करता है, वह इस लोक में सुख भोगकर अंत में मुक्ति पाता है।
भगवान वहीं हैं जहाँ उनका नाम गाया जाता है। अध्याय की सीख भी इसी से निकलती है, और इसके लिए न मंदिर ज़रूरी है न लंबा अनुष्ठान। शाम को परिवार के साथ बैठकर दस मिनट भगवान का कीर्तन कीजिए, चाहे हरे राम, हरे कृष्ण हो या कोई भी भजन।
भगवान विष्णु ने अपना निवास कहाँ बताया?
भगवान ने नारद जी से कहा कि वे न केवल वैकुंठ में रहते हैं, न केवल योगियों के हृदय में, बल्कि जहाँ भक्त प्रेम से उनका नाम गाते हैं, वहीं रहते हैं।
अध्याय के अनुसार कार्तिक व्रत कब से आरंभ होता है?
नारद जी के अनुसार यह व्रत आश्विन शुक्ल एकादशी से आरंभ होता है।
कलियुग में भगवान को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा साधन क्या है?
इस अध्याय के अनुसार उनका नाम-कीर्तन।
भगवान विष्णु और शिवजी को कौन से फूल नहीं चढ़ाते?
भगवान विष्णु को धतूरा, शिरीष और कटहल के फूल नहीं चढ़ाते। शिवजी को केवड़ा, जूही, मालती और अड़हुल नहीं चढ़ाते।
पूजा के अंत में क्या प्रार्थना करें?
भगवान से क्षमा माँगें और कहें कि मंत्र, विधि या भक्ति में जो कमी रह गई हो, उसे वे ही पूरा कर दें।
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