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अजा एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, व्रत कथा एवं मंत्र

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Astro Logics Admin
6 सितंबर 2026 · 6 मिनट पढ़ें
अजा एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, व्रत कथा एवं मंत्र

अजा एकादशी 2026 सोमवार, 7 सितम्बर 2026 को है। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है — बीते पापों का भार उतारने वाला व्रत — और पारण मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 को 06:03 AM से 02:44 PM के बीच किया जाता है।

नीचे अजा एकादशी 2026 की पूरी जानकारी है — तिथि का समय, शुभ मुहूर्त, पारण की अवधि और वह किस नियम से निकली, व्रत विधि, व्रत कथा और भगवान विष्णु के मंत्र। इस पृष्ठ की हर तिथि और हर समय हमारे अपने वैदिक पंचांग से दिल्ली के लिए गणना किया गया है, किसी कैलेंडर से लिया नहीं गया — आप इन्हें हमारे निःशुल्क दैनिक पंचांग पर स्वयं जाँच सकते हैं।

अजा एकादशी 2026: तिथि, समय और पारण

व्रत तिथिसोमवार, 7 सितम्बर 2026
मास एवं पक्षभाद्रपद, कृष्ण पक्ष
एकादशी तिथि आरम्भरविवार, 6 सितम्बर 2026, सायं 07:30
एकादशी तिथि समाप्तसोमवार, 7 सितम्बर 2026, सायं 05:05
पारणमंगलवार, 8 सितम्बर 2026, 06:03 AM से 02:44 PM
नक्षत्र / योगPunarvasu / Variyan

अजा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त (दिल्ली)

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:26 AM to 05:14 AM
  • अभिजित मुहूर्त: 11:55 AM to 12:43 PM
  • सूर्योदय / सूर्यास्त: 06:02 / 18:36
  • राहु काल (त्याज्य): 07:36 AM to 09:11 AM

हमारे पंचांग गणक के अनुसार इस दिन चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र (स्वामी बृहस्पति) में हैं और शुभ वरीयान योग चल रहा है — यह संयोग बीती बातों को छोड़ देने वाले व्रत के लिए अनुकूल माना गया है।

ये समय दिल्ली के लिए हैं। भारत में सूर्योदय लगभग चालीस मिनट तक आगे-पीछे होता है और उसी के साथ मुहूर्त भी खिसकते हैं — अपने नगर का समय पंचांग पर देखें।

अजा एकादशी पारण का समय

पारण मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 को 06:03 AM से 02:44 PM तक है। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) 7 सितम्बर रात 10:29 बजे ही समाप्त हो जाता है, इसलिए पूरा प्रातःकालीन समय पारण के लिए खुला है।

यह अवधि इस प्रकार निकलती है — पारण द्वादशी को, सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग, जिसमें पारण वर्जित है) बीत जाने पर, और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले किया जाता है। अवधि के आरम्भ में पारण करना विलम्ब से करने की अपेक्षा उत्तम माना गया है, और द्वादशी बीत जाने के बाद पारण करना व्रत के फल को नष्ट करने वाला कहा गया है।

अजा एकादशी का महत्व

अजा एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है और इसका फल बहुत स्पष्ट कहा गया है — बीते हुए पापों के बोझ से मुक्ति और खोई हुई वस्तु की पुनः प्राप्ति। अजा का अर्थ है "अजन्मा" — भगवान विष्णु का वह नाम जो कभी जन्म नहीं लेते, इसलिए कभी नष्ट भी नहीं होते। जिन लोगों ने जीवन में कुछ खोया हो — मान, कार्य, स्वास्थ्य, सम्बन्ध या मन की शांति — वे यह व्रत विशेष रूप से रखते हैं। नीचे दी गई कथा किसी निर्धन के धनी बन जाने की कथा नहीं है; यह उस राजा की कथा है जिसने सत्य पर टिके रहते हुए सब कुछ खो दिया और बिना कोई समझौता किए सब कुछ वापस पाया।

अजा एकादशी व्रत विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त (04:26 से 05:14 AM) में उठकर स्नान करें और संकल्प लें — व्रत किस हेतु है, यह स्पष्ट कहें।
  • पूजा स्थान स्वच्छ करें, भगवान विष्णु का चित्र या विग्रह स्थापित करें और घी का दीपक जलाएँ।
  • तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन, धूप, फल और पंचामृत अर्पित करें। किसी भी विष्णु व्रत में तुलसी अनिवार्य है — परन्तु एकादशी के दिन तुलसी न तोड़ें; पत्ते एक दिन पूर्व संध्या को ही तोड़ लें।
  • नीचे दिए विष्णु मंत्रों का जप करें और अजा एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें — निर्जला कठिनतम रूप है और वैकल्पिक है; फल, दूध और जल सहित फलाहार सामान्य प्रचलन है। चावल और अन्न का त्याग हर एकादशी व्रती करता है।
  • संध्या भजन और भगवान विष्णु की आरती में बिताएँ। अनेक घरों में रात्रि जागरण भी किया जाता है।
  • अगले दिन ऊपर दी गई अवधि में पारण करें, उससे पूर्व किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन और दक्षिणा अर्पित करें।

अजा एकादशी व्रत कथा

सूर्यवंश में राजा हरिश्चंद्र हुए, जिनका वचन कभी नहीं टूटा। स्वप्न में ऋषि विश्वामित्र को दिए वचन से बँधकर उन्होंने अपना राज्य दान कर दिया, और जब राज्य से भी ऋण न चुका तो अपनी रानी तारामती और पुत्र रोहिताश्व को बेच दिया, और अंत में स्वयं को भी बेच दिया — एक चांडाल के हाथ, श्मशान में, जहाँ वे मृतकों पर कर वसूलते थे।

वर्षों वही भयानक कार्य चलता रहा। फिर उन्हीं का पुत्र सर्पदंश से चल बसा, और तारामती उसी श्मशान में शव लेकर पहुँचीं जिसकी रखवाली उनके पति कर रहे थे। पहले दोनों एक-दूसरे को पहचान भी न सके। पहचानने पर भी हरिश्चंद्र शव को जाने न दे सके — वे सेवक थे, कर देय था, और जो सेवक स्वामी का नियम तोड़ दे वह मिथ्यावादी से भिन्न नहीं। तारामती के पास देने को कुछ न था। राजा वहीं खड़े रहे, उस सत्य को थामे हुए जिसकी कीमत उनका अंतिम पुत्र थी।

ऋषि गौतम ने उन्हें इसी अवस्था में देखा और उपाय बताया — भाद्रपद कृष्ण एकादशी का व्रत रखो और उसका पुण्य उस सब की मुक्ति के लिए अर्पित करो जो तुमसे छीन लिया गया है। हरिश्चंद्र ने बची-खुची शक्ति से वह व्रत किया।

उसी व्रत के पुण्य से देवता उतर आए। पुत्र जीवित हुआ, रानी को उसका पद मिला, राज्य पुनः हाथ में आया — और इनमें से कुछ भी पाने के लिए उनका एक भी वचन नहीं टूटा। इसीलिए अजा एकादशी वे लोग रखते हैं जिन पर कोई अनुचित हानि आ पड़ी हो, और वे भी जो किसी पुराने पाप का भार उतारना चाहते हों।

अजा एकादशी के मंत्र

पूजा और दिनभर के जप में इन मंत्रों का उच्चारण करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

ॐ नमो नारायणाय॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्‌॥

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥

सम्पूर्ण आरती, चालीसा और मंत्र हमारे भक्ति संग्रह में उपलब्ध हैं, और एकादशी माता की आरती वही है जो अधिकांश परिवार संध्या दीप के समय गाते हैं।

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अजा एकादशी विष्णु व्रत है, और सत्यनारायण कथा वही विष्णु पूजा है जो अधिकांश परिवार संकल्प पूरा होने या कष्ट टलने पर कराते हैं। यदि आप चाहते हैं कि यह विधिवत पंडितों द्वारा आपके नाम के संकल्प के साथ कराई जाए — रिकॉर्ड किया गया वीडियो, छायाचित्र और प्रसाद आप तक पहुँचाया जाए — तो इस व्रत के अनुकूल ये दो अनुष्ठान हैं:

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अजा एकादशी 2026: सामान्य प्रश्न

अजा एकादशी 2026 कब है?
अजा एकादशी 2026 सोमवार, 7 सितम्बर को है। एकादशी तिथि 6 सितम्बर सायं 07:30 बजे आरम्भ होकर 7 सितम्बर सायं 05:05 बजे समाप्त होती है, और 7 तारीख को सूर्योदय के समय यही तिथि चल रही है, इसलिए व्रत उसी दिन रखा जाता है।

अजा एकादशी 2026 का पारण समय क्या है?
पारण मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 को प्रातः 06:03 से दोपहर 02:44 बजे तक (दिल्ली) है। यह अवधि सूर्योदय से आरम्भ होकर द्वादशी तिथि की समाप्ति पर बंद हो जाती है।

अजा एकादशी का व्रत किसलिए रखा जाता है?
परम्परा से यह व्रत बीते पापों के भार से मुक्ति और खोई हुई वस्तु — पद, कार्य, स्वास्थ्य या मन की शांति — की पुनः प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इसका कारण राजा हरिश्चंद्र की कथा है।

क्या अजा एकादशी व्रत में जल पी सकते हैं?
हाँ। निर्जला व्रत कठिनतम रूप है और वैकल्पिक है। अधिकांश लोग जल, फल और दूध के साथ फलाहार व्रत रखते हैं। स्वास्थ्य सर्वोपरि है — शास्त्र किसी को व्रत के लिए शरीर को कष्ट देने को नहीं कहते।

यह व्रत आपके लिए वैसा फल देगा या नहीं, यह केवल तिथि पर निर्भर नहीं करता — यह इस पर निर्भर करता है कि आपकी कौन-सी दशा चल रही है और आपकी अपनी कुंडली क्या कह रही है। आरम्भ अपनी निःशुल्क कुंडली से कीजिए, ₹49 में विस्तृत 46 पृष्ठ की कुंडली रिपोर्ट लीजिए, या अपनी कुंडली के अनुसार सही व्रत और उपाय जानने के लिए ज्योतिषी से बात कीजिए। कोई संस्कार करना है? निःशुल्क मुहूर्त खोजक आपके लिए दिनों को क्रम में लगा देगा।

इसी श्रृंखला से और: पुत्रदा एकादशी · कामिका एकादशी · देवशयनी एकादशी

सूचना: इस पृष्ठ की तिथियाँ और समय हमारे अपने वैदिक पंचांग से दिल्ली (28.61°उ, 77.21°पू) के लिए गणना किए गए हैं और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास के अनुसार हैं। ये नगर और पंचांग परम्परा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। पारण की अवधि मानक नियम — सूर्योदय के बाद, हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्ति से पूर्व — से निकाली गई है। व्रत रखने से पूर्व अपने परिवार के पंचांग अथवा किसी विद्वान पंडित से पुष्टि अवश्य कर लें।

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