नहाय खाय 2026 शुक्रवार, 13 नवम्बर को है। यह छठ पूजा 2026 के चार दिनों में पहला दिन है, जो कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि गुरुवार, 12 नवम्बर को शाम 06:10 पर आरम्भ होकर 13 नवम्बर को रात 08:43 पर समाप्त होती है, इसलिए 13 तारीख का सूर्योदय चतुर्थी में है। नाम ही दिन का अर्थ बताता है: नहाय यानी स्नान, और खाय यानी भोजन।
13 नवम्बर का सूर्योदय और सूर्यास्त, हमारे अपने पंचांग से। अपने सटीक स्थान के लिए दैनिक पंचांग देखें।
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| पटना | सुबह 06:05 | शाम 05:02 |
| गया | सुबह 06:05 | शाम 05:04 |
| मुज़फ़्फ़रपुर | सुबह 06:05 | शाम 05:00 |
| दरभंगा | सुबह 06:03 | शाम 04:58 |
| भागलपुर | सुबह 05:57 | शाम 04:55 |
| राँची | सुबह 06:01 | शाम 05:05 |
| वाराणसी | सुबह 06:14 | शाम 05:11 |
| लखनऊ | सुबह 06:24 | शाम 05:17 |
| कोलकाता | सुबह 05:48 | शाम 04:54 |
| दिल्ली | सुबह 06:42 | शाम 05:29 |
| मुंबई | सुबह 06:45 | शाम 06:01 |
भोजन है कद्दू-भात: अरवा चावल, चने की दाल और लौकी (बिहार में कद्दू कहलाती है) की सब्ज़ी, घी में सेंधा नमक के साथ बनी। इसमें प्याज़, लहसुन और साधारण नमक नहीं डाला जाता। लौकी इसलिए चुनी जाती है कि वह हल्की और पानी से भरपूर होती है, आगे के उपवास के दिनों से पहले उपयुक्त भोजन। बहुत से घरों में आँवले की चटनी या लौकी के पकौड़े भी परोसे जाते हैं।
छठ पूजा 2026 के चारों दिन: नहाय खाय (13 नवम्बर) · खरना (14 नवम्बर) · संध्या अर्घ्य (15 नवम्बर) · ऊषा अर्घ्य (16 नवम्बर)। साथ में पढ़ें: छठ पूजा 2026 की पूरी मार्गदर्शिका, छठ व्रत कथा और छठी मैया की आरती व छठ गीत।
2026 में नहाय खाय कब है?
शुक्रवार, 13 नवम्बर 2026 को, कार्तिक शुक्ल चतुर्थी, छठ पूजा का पहला दिन।
नहाय खाय पर क्या खाया जाता है?
कद्दू-भात: अरवा चावल, चने की दाल और लौकी की सब्ज़ी, घी और सेंधा नमक में बनी, बिना प्याज़-लहसुन के।
क्या नहाय खाय पर व्रती पानी पी सकते हैं?
हाँ। नहाय खाय उपवास का दिन नहीं है। व्रती एक समय सात्विक भोजन करते हैं और पानी पी सकते हैं। उपवास अगले दिन, खरना से आरम्भ होता है।
नहाय खाय 2026 पर सूर्योदय कब है?
13 नवम्बर को सूर्योदय पटना में सुबह 06:05, कोलकाता में सुबह 05:48 और दिल्ली में सुबह 06:42 पर है। ऊपर की तालिका में ग्यारह शहर हैं।
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