छठ की कोई एक लिखित आरती नहीं है, जैसी दूसरे पर्वों की होती है। घाट पर परिवार छठ गीत गाते हैं: भोजपुरी, मैथिली और मगही के लोकगीत, जो माँ से बेटी तक पीढ़ियों से चले आ रहे हैं और चारों दिन गाए जाते हैं। इनमें से एक गीत छठी मैया की आरती के रूप में गाया जाता है, और साथ में सूर्य देव की आरती भी। 2026 में छठ पूजा 13 से 16 नवम्बर तक है; देखें छठ पूजा 2026 मार्गदर्शिका।
अधिकतर परिवार छठी मैया की आरती के रूप में यह लोकगीत गाते हैं, जो इस प्रकार आरम्भ होता है:
ऊ जे केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरछाय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥
अर्थ: छठ के लिए केले का घवद पक गया है, और उस पर एक तोता मँडरा रहा है। "मैं तुम्हें धनुष से मारूँगी," भक्त चेतावनी देती है, और तोता मूर्छित होकर गिर पड़ता है। उसकी सुगनी वियोग में रोती है और आदित्य, सूर्य से सहायता माँगती है। गीत कहता है कि सूर्य को अर्पित कोई वस्तु अर्घ्य से पहले न छुई जाए, और उसका अंत करुणा में होता है: सूर्य से उस पक्षी की भी रक्षा की विनती है। आगे के पद इसी तरह नारियल, गन्ने और दूसरे प्रसाद के साथ चलते हैं, हर बार छठी मैया की टेक के साथ।
काँच ही बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय।
अर्थ: "बहंगी कच्चे बाँस की है, और चलते हुए लचकती जाती है।" यह घाट तक जाने का गीत है, जो प्रसाद से भरा दउरा कंधे या सिर पर ले जाते समय गाया जाता है। लचकती बहंगी परिवार की भक्ति का भार है।
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झाँके झुँके।
अर्थ: "केले के पत्ते पर सूर्य उगते हैं, झाँकते हुए।" यह घाट पर केले के पत्तों पर प्रसाद सजाते समय गाया जाता है, मानो सूर्य उस पर झाँक रहे हों।
उग हो सूरज देव, भइल अरघ के बेर।
अर्थ: "उदित हो, हे सूर्य देव, अर्घ्य का समय हो गया है।" यह अंतिम सुबह का गीत है, जो ऊषा अर्घ्य से पहले अँधेरे में 36 घंटे की उपवासी स्त्रियाँ गाती हैं, सूर्य से उदय होकर अर्घ्य स्वीकार करने की विनती करते हुए।
छठ पूजा 2026 के चारों दिन: नहाय खाय (13 नवम्बर) · खरना (14 नवम्बर) · संध्या अर्घ्य (15 नवम्बर) · ऊषा अर्घ्य (16 नवम्बर)। साथ में पढ़ें: छठ पूजा 2026 की पूरी मार्गदर्शिका, छठ व्रत कथा और छठी मैया की आरती व छठ गीत।
छठी मैया की आरती के रूप में कौन-सा गीत गाया जाता है?
अधिकतर परिवार छठी मैया की टेक वाला लोकगीत केरवा जे फरेला घवद से गाते हैं, साथ में सूर्य देव की आरती।
घाट जाते समय कौन-सा छठ गीत गाया जाता है?
काँच ही बाँस के बहंगिया, प्रसाद के दउरा के भार से लचकती बाँस की बहंगी का गीत।
ऊषा अर्घ्य से पहले कौन-सा गीत गाया जाता है?
उग हो सूरज देव, भइल अरघ के बेर, जिसमें सूर्य से उदय होने की विनती है क्योंकि अर्घ्य का समय आ गया है।
छठ गीत किस भाषा में गाए जाते हैं?
मुख्यतः भोजपुरी, मैथिली और मगही में, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की भाषाएँ, जहाँ छठ सबसे व्यापक रूप से मनाया जाता है।
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