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पापांकुशा एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, व्रत कथा एवं मंत्र

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Astro Logics
18 अक्टूबर 2026 · 6 मिनट पढ़ें
पापांकुशा एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, व्रत कथा एवं मंत्र

पापांकुशा एकादशी 2026 बृहस्पतिवार, 22 अक्टूबर 2026 को है। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है - वह अंकुश जो जीवन को पाप से मोड़ देता है - और पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को 06:27 AM से 02:37 PM के बीच किया जाता है।

नीचे पापांकुशा एकादशी 2026 की पूरी जानकारी है - तिथि का समय, शुभ मुहूर्त, पारण की अवधि और वह किस नियम से निकली, व्रत विधि, व्रत कथा और भगवान पद्मनाभ, विष्णु का एक रूप के मंत्र। इस पृष्ठ की हर तिथि और हर समय हमारे अपने वैदिक पंचांग से दिल्ली के लिए गणना किया गया है, किसी कैलेंडर से लिया नहीं गया - आप इन्हें हमारे निःशुल्क दैनिक पंचांग पर स्वयं जाँच सकते हैं।

पापांकुशा एकादशी 2026: तिथि, समय और पारण

व्रत तिथिबृहस्पतिवार, 22 अक्टूबर 2026
मास एवं पक्षआश्विन, शुक्ल पक्ष
एकादशी तिथि आरम्भबुधवार, 21 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:13
एकादशी तिथि समाप्तबृहस्पतिवार, 22 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:49
पारणशुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, 06:27 AM से 02:37 PM
नक्षत्र / योगShatabhisha / Vriddhi

पापांकुशा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त (दिल्ली)

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:50 AM to 05:38 AM
  • अभिजित मुहूर्त: 11:41 AM to 12:29 PM
  • सूर्योदय / सूर्यास्त: 06:26 / 17:45
  • राहु काल (त्याज्य): 01:30 PM to 02:55 PM

चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में हैं - "सौ वैद्य" - और शुभ वृद्धि योग चल रहा है, जो बढ़ोतरी का योग है। जिस व्रत का नाम ही उस अंकुश पर है जो जीवन को पाप से मोड़ देता है, उसके लिए आरोग्य का नक्षत्र और वृद्धि का योग उपयुक्त संयोग है।

ये समय दिल्ली के लिए हैं। भारत में सूर्योदय लगभग चालीस मिनट तक आगे-पीछे होता है और उसी के साथ मुहूर्त भी खिसकते हैं - अपने नगर का समय पंचांग पर देखें।

पापांकुशा एकादशी पारण का समय

पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को 06:27 AM से 02:37 PM तक है। हरि वासर 22 अक्टूबर रात्रि 08:46 बजे, एक रात पहले ही समाप्त हो जाता है, इसलिए 23 तारीख का पूरा प्रातःकाल पारण के लिए उपलब्ध है।

यह अवधि इस प्रकार निकलती है - पारण द्वादशी को, सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग, जिसमें पारण वर्जित है) बीत जाने पर, और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले किया जाता है। अवधि के आरम्भ में पारण करना विलम्ब से करने की अपेक्षा उत्तम माना गया है, और द्वादशी बीत जाने के बाद पारण करना व्रत के फल को नष्ट करने वाला कहा गया है।

पापांकुशा एकादशी का महत्व

नाम स्वयं पूरा उपदेश है - पाप अर्थात दुष्कर्म, और अंकुश वह लोहे का काँटा जिससे महावत हाथी को मोड़ता है। हाथी से तर्क नहीं किया जा सकता, और आदत से भी नहीं - दोनों सही स्थान पर लगे किसी छोटे से साधन से ही मुड़ते हैं। पापांकुशा एकादशी आश्विन के शुक्ल पक्ष में, दशहरे के कुछ ही दिनों बाद आती है, जब पर्वकाल स्वयं यह कह चुका होता है कि अंततः जीतता कौन है। यह व्रत वे रखते हैं जो किसी बंधी हुई आदत पर केवल पछताना नहीं, उसे तोड़ना चाहते हैं; और परम्परा में इसे रखने में सबसे सरल तथा फल में सबसे उदार एकादशियों में गिना गया है।

पापांकुशा एकादशी व्रत विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त (04:50 से 05:38 AM) में उठकर स्नान करें और संकल्प लें - व्रत किस हेतु है, यह स्पष्ट कहें।
  • पूजा स्थान स्वच्छ करें, भगवान पद्मनाभ, विष्णु का एक रूप का चित्र या विग्रह स्थापित करें और घी का दीपक जलाएँ।
  • तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन, धूप, फल और पंचामृत अर्पित करें। किसी भी विष्णु व्रत में तुलसी अनिवार्य है - परन्तु एकादशी के दिन तुलसी न तोड़ें; पत्ते एक दिन पूर्व संध्या को ही तोड़ लें।
  • नीचे दिए विष्णु मंत्रों का जप करें और पापांकुशा एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें - निर्जला कठिनतम रूप है और वैकल्पिक है; फल, दूध और जल सहित फलाहार सामान्य प्रचलन है। चावल और अन्न का त्याग हर एकादशी व्रती करता है।
  • संध्या भजन और भगवान विष्णु की आरती में बिताएँ। अनेक घरों में रात्रि जागरण भी किया जाता है।
  • अगले दिन ऊपर दी गई अवधि में पारण करें, उससे पूर्व किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन और दक्षिणा अर्पित करें।

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था - नाम का अर्थ है "क्रोधी", और उसने वह नाम अर्जित किया था। उसका सारा जीवन हिंसा, चोरी और निर्दयता में बीता, और उसने कभी एक क्षण भी इस पर विचार नहीं किया।

जब अंत निकट आया, यमराज ने अपने दूतों से दिन और घड़ी कहलवा भेजी। क्रोधन, जो कभी किसी से नहीं डरा था, उससे डर गया। वह वन में भागा और ऋषि अंगिरा के आश्रम पहुँचा, उनके चरणों में गिरा और जीवन का पहला सच्चा प्रश्न पूछा - क्या मुझ जैसे मनुष्य के लिए अब भी कुछ शेष है?

ऋषि ने न यह कहा कि तुम्हारा उद्धार असंभव है, न यह कि यह सरल होगा। उन्होंने कहा - पूर्ण श्रद्धा से आश्विन शुक्ल एकादशी - पापांकुशा - का व्रत करो और भगवान पद्मनाभ की आराधना करो।

क्रोधन ने ठीक वैसा ही किया। कहा जाता है कि उस व्रत ने उस पूरे जीवन का संचित भार जला दिया, और जब यमदूत आए तो वे उसे छू भी न सके। जिस बहेलिये ने जीवन भर कुछ भी उचित नहीं किया था, वह एक दिन के सम्यक व्रत के बल पर विष्णुलोक गया। कथा का आशय यह नहीं कि पाप सस्ता है; आशय यह है कि अंकुश उस हाथी पर भी काम करता है जो वर्षों से गलत दिशा में दौड़ रहा हो।

पापांकुशा एकादशी के मंत्र

पूजा और दिनभर के जप में इन मंत्रों का उच्चारण करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

ॐ नमो नारायणाय॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्‌॥

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥

सम्पूर्ण आरती, चालीसा और मंत्र हमारे भक्ति संग्रह में उपलब्ध हैं, और एकादशी माता की आरती वही है जो अधिकांश परिवार संध्या दीप के समय गाते हैं।

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पापांकुशा किसी बंधी हुई आदत को तोड़ने के लिए रखा जाने वाला विष्णु व्रत है, और सत्यनारायण कथा वही विष्णु पूजा है जो परिवार ऐसे ही नए आरम्भ पर कराते हैं। यदि आप चाहते हैं कि यह विधिवत पंडितों द्वारा आपके नाम के संकल्प के साथ कराई जाए - रिकॉर्ड किया गया वीडियो, छायाचित्र और प्रसाद आप तक पहुँचाया जाए - तो इस व्रत के अनुकूल ये दो अनुष्ठान हैं:

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पापांकुशा एकादशी 2026: सामान्य प्रश्न

पापांकुशा एकादशी 2026 कब है?
पापांकुशा एकादशी 2026 बृहस्पतिवार, 22 अक्टूबर को है। एकादशी तिथि 21 अक्टूबर दोपहर 02:13 से 22 अक्टूबर दोपहर 02:49 तक रहती है, और 22 तारीख को सूर्योदय के समय यही तिथि है।

पापांकुशा एकादशी 2026 का पारण समय क्या है?
पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को प्रातः 06:27 से दोपहर 02:37 तक (दिल्ली) है। हरि वासर एक रात पहले ही समाप्त हो चुका है, इसलिए पूरा प्रातःकाल उपलब्ध है।

पापांकुशा का अर्थ क्या है?
पाप अर्थात दुष्कर्म और अंकुश वह काँटा जिससे महावत हाथी को मोड़ता है। व्रत का नाम इसी भाव पर है कि जमी हुई बुरी आदत तर्क से नहीं, मोड़ने से बदलती है।

इस दिन विष्णु के किस रूप की पूजा होती है?
भगवान पद्मनाभ की - जिनकी नाभि से कमल प्रकट होता है - यही रूप पापांकुशा एकादशी की कथा में कहा गया है।

यह व्रत आपके लिए वैसा फल देगा या नहीं, यह केवल तिथि पर निर्भर नहीं करता - यह इस पर निर्भर करता है कि आपकी कौन-सी दशा चल रही है और आपकी अपनी कुंडली क्या कह रही है। आरम्भ अपनी निःशुल्क कुंडली से कीजिए, ₹49 में विस्तृत 46 पृष्ठ की कुंडली रिपोर्ट लीजिए, या अपनी कुंडली के अनुसार सही व्रत और उपाय जानने के लिए ज्योतिषी से बात कीजिए। कोई संस्कार करना है? निःशुल्क मुहूर्त खोजक आपके लिए दिनों को क्रम में लगा देगा।

इसी श्रृंखला से और: देवशयनी एकादशी · अजा एकादशी · परिवर्तिनी एकादशी · इन्दिरा एकादशी।

सूचना: इस पृष्ठ की तिथियाँ और समय हमारे अपने वैदिक पंचांग से दिल्ली (28.61°उ, 77.21°पू) के लिए गणना किए गए हैं और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास के अनुसार हैं। ये नगर और पंचांग परम्परा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। पारण की अवधि मानक नियम - सूर्योदय के बाद, हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्ति से पूर्व - से निकाली गई है। व्रत रखने से पूर्व अपने परिवार के पंचांग अथवा किसी विद्वान पंडित से पुष्टि अवश्य कर लें।

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