Pooja Vidhi

परिवर्तिनी एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, व्रत कथा एवं मंत्र

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Astro Logics Admin
18 सितंबर 2026 · 6 मिनट पढ़ें
परिवर्तिनी एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, व्रत कथा एवं मंत्र

परिवर्तिनी एकादशी 2026 मंगलवार, 22 सितम्बर 2026 को है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है — जिस दिन शयन करते भगवान करवट बदलते हैं — और पारण बुधवार, 23 सितम्बर 2026 को 06:10 AM से 10:51 PM के बीच किया जाता है।

नीचे परिवर्तिनी एकादशी 2026 की पूरी जानकारी है — तिथि का समय, शुभ मुहूर्त, पारण की अवधि और वह किस नियम से निकली, व्रत विधि, व्रत कथा और भगवान वामन, विष्णु के पाँचवें अवतार के मंत्र। इस पृष्ठ की हर तिथि और हर समय हमारे अपने वैदिक पंचांग से दिल्ली के लिए गणना किया गया है, किसी कैलेंडर से लिया नहीं गया — आप इन्हें हमारे निःशुल्क दैनिक पंचांग पर स्वयं जाँच सकते हैं।

परिवर्तिनी एकादशी 2026: तिथि, समय और पारण

व्रत तिथिमंगलवार, 22 सितम्बर 2026
मास एवं पक्षभाद्रपद, शुक्ल पक्ष
एकादशी तिथि आरम्भसोमवार, 21 सितम्बर 2026, रात्रि 08:02
एकादशी तिथि समाप्तमंगलवार, 22 सितम्बर 2026, रात्रि 09:44
पारणबुधवार, 23 सितम्बर 2026, 06:10 AM से 10:51 PM
नक्षत्र / योगShravana / Atiganda

परिवर्तिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त (दिल्ली)

  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:33 AM to 05:21 AM
  • अभिजित मुहूर्त: 11:50 AM to 12:38 PM
  • सूर्योदय / सूर्यास्त: 06:09 / 18:18
  • राहु काल (त्याज्य): 03:16 PM to 04:47 PM

चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में हैं — यह विष्णु का अपना नक्षत्र है और इसका नाम ही "सुनने" पर पड़ा है, जो उस दिन के लिए उपयुक्त है जिसका मुख्य कर्म कथा श्रवण है। हमारा गणक यह भी दिखाता है कि अतिगण्ड योग चल रहा है, जो कठिन योगों में गिना जाता है — इससे व्रत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, परन्तु किसी असंबंधित नए कार्य का आरम्भ इस दिन उचित नहीं।

ये समय दिल्ली के लिए हैं। भारत में सूर्योदय लगभग चालीस मिनट तक आगे-पीछे होता है और उसी के साथ मुहूर्त भी खिसकते हैं — अपने नगर का समय पंचांग पर देखें।

परिवर्तिनी एकादशी पारण का समय

पारण बुधवार, 23 सितम्बर 2026 को 06:10 AM से 10:51 PM तक है। हरि वासर 23 सितम्बर प्रातः 04:00 बजे, सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाता है, इसलिए पारण सूर्योदय से किया जा सकता है — और जितना जल्दी हो उतना उत्तम।

यह अवधि इस प्रकार निकलती है — पारण द्वादशी को, सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग, जिसमें पारण वर्जित है) बीत जाने पर, और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले किया जाता है। अवधि के आरम्भ में पारण करना विलम्ब से करने की अपेक्षा उत्तम माना गया है, और द्वादशी बीत जाने के बाद पारण करना व्रत के फल को नष्ट करने वाला कहा गया है।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

परिवर्तिनी एकादशी — जिसे पार्श्व, वामन या जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं — चातुर्मास के मध्य में आती है, उन चार महीनों के बीच जिनमें भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। परिवर्तन का अर्थ है करवट बदलना। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान अपनी योगनिद्रा में एक करवट से दूसरी करवट लेते हैं, और यही एक हलचल इस व्रत का पूरा अर्थ है — मोड़। यह व्रत वे रखते हैं जो किसी स्थिति के बदलने की प्रतीक्षा में हैं — रुका हुआ मुकदमा, ठहरा हुआ कार्यक्षेत्र, या कोई निर्णय जो हो ही नहीं पा रहा। इससे जुड़े अवतार वामन हैं, जिन्होंने तीन पग भूमि माँगी और उन्हीं से सृष्टि का क्रम बदल दिया।

परिवर्तिनी एकादशी व्रत विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त (04:33 से 05:21 AM) में उठकर स्नान करें और संकल्प लें — व्रत किस हेतु है, यह स्पष्ट कहें।
  • पूजा स्थान स्वच्छ करें, भगवान वामन, विष्णु के पाँचवें अवतार का चित्र या विग्रह स्थापित करें और घी का दीपक जलाएँ।
  • तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन, धूप, फल और पंचामृत अर्पित करें। किसी भी विष्णु व्रत में तुलसी अनिवार्य है — परन्तु एकादशी के दिन तुलसी न तोड़ें; पत्ते एक दिन पूर्व संध्या को ही तोड़ लें।
  • नीचे दिए विष्णु मंत्रों का जप करें और परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें — निर्जला कठिनतम रूप है और वैकल्पिक है; फल, दूध और जल सहित फलाहार सामान्य प्रचलन है। चावल और अन्न का त्याग हर एकादशी व्रती करता है।
  • संध्या भजन और भगवान विष्णु की आरती में बिताएँ। अनेक घरों में रात्रि जागरण भी किया जाता है।
  • अगले दिन ऊपर दी गई अवधि में पारण करें, उससे पूर्व किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन और दक्षिणा अर्पित करें।

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

प्रह्लाद के पौत्र, दैत्यराज बलि ने तीनों लोक जीत लिए थे। वे अत्याचारी नहीं थे — दानी, सत्यवादी और भक्त थे — परन्तु देवता अपने स्थान से हटा दिए गए थे, और बल से टिका शासन कितना ही अच्छा क्यों न हो, टिकता नहीं। इंद्र और देवगण विष्णु के पास गए।

विष्णु अदिति और कश्यप के यहाँ वामन रूप में प्रकट हुए — एक छोटे, साधारण से ब्राह्मण बालक। वे बलि के महायज्ञ में गए और भिक्षा माँगी — अपने ही पगों से नापी हुई तीन पग भूमि। बलि के गुरु शुक्राचार्य ने पहचान लिया कि यह बालक कौन है और राजा को वचन देने से रोका। बलि वचन दे चुके थे। उन्होंने उसे वापस नहीं लिया।

बालक बढ़ने लगे। एक पग में पृथ्वी नप गई, दूसरे में स्वर्ग, और तीसरे के लिए कहीं स्थान न बचा। बलि ने सिर झुकाकर स्वयं को अर्पित कर दिया — यहाँ रखिए अपना चरण। विष्णु ने बलि के मस्तक पर चरण रखकर उन्हें पाताल पहुँचा दिया, और फिर, क्योंकि राजा ने अंत तक अपना वचन निभाया, उन्हें सुतल का राज्य दिया और स्वयं उसके द्वारपाल बनकर खड़े हो गए।

उसी पाताल में, भाद्रपद शुक्ल एकादशी को, शयन करते भगवान करवट बदलते हैं — ऐसा कहा जाता है। इस दिन व्रत रखना और यह कथा सुनना रुकी हुई बात को गति देने वाला माना गया है — क्योंकि कथा स्वयं उसी क्षण की है जब एक जमी हुई व्यवस्था करवट बदल गई थी।

परिवर्तिनी एकादशी के मंत्र

पूजा और दिनभर के जप में इन मंत्रों का उच्चारण करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

ॐ नमो नारायणाय॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्‌॥

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥

सम्पूर्ण आरती, चालीसा और मंत्र हमारे भक्ति संग्रह में उपलब्ध हैं, और एकादशी माता की आरती वही है जो अधिकांश परिवार संध्या दीप के समय गाते हैं।

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वामन कथा का केंद्र तीन पग भूमि है — यही कारण है कि निर्माण आरम्भ करने वाले परिवार अक्सर यह एकादशी रखते हैं और उसके बाद भूमि पूजन कराते हैं। यदि आप चाहते हैं कि यह विधिवत पंडितों द्वारा आपके नाम के संकल्प के साथ कराई जाए — रिकॉर्ड किया गया वीडियो, छायाचित्र और प्रसाद आप तक पहुँचाया जाए — तो इस व्रत के अनुकूल ये दो अनुष्ठान हैं:

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परिवर्तिनी एकादशी 2026: सामान्य प्रश्न

परिवर्तिनी एकादशी 2026 कब है?
परिवर्तिनी (पार्श्व / वामन) एकादशी 2026 मंगलवार, 22 सितम्बर को है। तिथि 21 सितम्बर रात्रि 08:02 से 22 सितम्बर रात्रि 09:44 तक रहती है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 का पारण समय क्या है?
पारण बुधवार, 23 सितम्बर 2026 को प्रातः 06:10 से रात्रि 10:51 तक (दिल्ली) है। उस दिन हरि वासर प्रातः 04:00 बजे समाप्त हो जाता है, इसलिए सूर्योदय से ही पारण किया जा सकता है — जितना जल्दी हो उतना उत्तम।

इसे परिवर्तिनी एकादशी क्यों कहते हैं?
क्योंकि चातुर्मास में शयन कर रहे भगवान विष्णु इसी दिन करवट बदलते हैं। परिवर्तन का अर्थ है करवट बदलना, और यह व्रत किसी रुकी हुई स्थिति के मोड़ से जोड़ा जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी पर किस अवतार की पूजा होती है?
भगवान वामन की, जो विष्णु के पाँचवें अवतार हैं और जिनकी तीन पग भूमि की कथा इसी एकादशी की कथा है।

यह व्रत आपके लिए वैसा फल देगा या नहीं, यह केवल तिथि पर निर्भर नहीं करता — यह इस पर निर्भर करता है कि आपकी कौन-सी दशा चल रही है और आपकी अपनी कुंडली क्या कह रही है। आरम्भ अपनी निःशुल्क कुंडली से कीजिए, ₹49 में विस्तृत 46 पृष्ठ की कुंडली रिपोर्ट लीजिए, या अपनी कुंडली के अनुसार सही व्रत और उपाय जानने के लिए ज्योतिषी से बात कीजिए। कोई संस्कार करना है? निःशुल्क मुहूर्त खोजक आपके लिए दिनों को क्रम में लगा देगा।

इसी श्रृंखला से और: पुत्रदा एकादशी · कामिका एकादशी · देवशयनी एकादशी · अजा एकादशी

सूचना: इस पृष्ठ की तिथियाँ और समय हमारे अपने वैदिक पंचांग से दिल्ली (28.61°उ, 77.21°पू) के लिए गणना किए गए हैं और उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास के अनुसार हैं। ये नगर और पंचांग परम्परा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। पारण की अवधि मानक नियम — सूर्योदय के बाद, हरि वासर के बाद, द्वादशी समाप्ति से पूर्व — से निकाली गई है। व्रत रखने से पूर्व अपने परिवार के पंचांग अथवा किसी विद्वान पंडित से पुष्टि अवश्य कर लें।

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